तुम्हें क्या लगता है
यूँ हाथ झटक कर चले जाओगे
और ये रिश्ता टूट जायेगा
जो बना है
कई रिश्तों को ताक पर रख कर?
तुम्हें क्या लगता है
क्या इतना आसान है
पेड़ की जड़ों से
मिट्टी निकाल लेना
या
बारिश से, झरनों से,
हवा से
संगीत मिटा देना?
क्या इतना आसान है
पेड़ की जड़ों से
मिट्टी निकाल लेना
या
बारिश से, झरनों से,
हवा से
संगीत मिटा देना?
तुम्हें क्या लगता है
लहरें तटों से
गुस्से में टकराती हैं
या
भौंरे फूलों को
चोट पहुंचाते हैं?
लहरें तटों से
गुस्से में टकराती हैं
या
भौंरे फूलों को
चोट पहुंचाते हैं?
ये धरती, सूरज, चाँद
भी हम जैसे हैं
ग्रहण तो लगता है
रिश्ते नहीं टूटते
भी हम जैसे हैं
ग्रहण तो लगता है
रिश्ते नहीं टूटते
पता है? मुझे लगता है
ये ग्रहण भी मिट जायेगा
और ये पेड़, मिट्टी, बारिश, झरने, हवा
ये भौंरे, ये फूल
सभी अपने-अपने रिश्तों में रम जाएंगे
ये ग्रहण भी मिट जायेगा
और ये पेड़, मिट्टी, बारिश, झरने, हवा
ये भौंरे, ये फूल
सभी अपने-अपने रिश्तों में रम जाएंगे
और हम चल रहे होंगे
इनके बीच, फिर से
हाथों में हाथ लिए
तुम्हे क्या लगता है?
इनके बीच, फिर से
हाथों में हाथ लिए
तुम्हे क्या लगता है?

