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शनिवार, 11 अप्रैल 2015

साथ चलेंगे

अब जो हंसकर थाम लिया है
हाथ तुम्हारा, साथ चलेंगे
बीते किस्से बीत चूके हैं
करने नई शुरुआत चलेंगे

ऋतु कोई भी आये जाये
जो भी हों हालात चलेंगे
सर्द हवा के झोंके हों
या गर्मी और बरसात चलेंगे

कल ना जाने क्या हो जाये
सपनें सारे ना खो जाएं
अंजाने से डर भी होंगे
मन में कई सवालात चलेंगे

डर ये सारे छोड़ के पीछे
हाथों में ले हाथ चलेंगे
धरती और सूरज के जैसे
मिलकर हम दिन रात चलेंगे

अब जो हंसकर थाम लिया है
हाथ तुम्हारा, साथ चलेंगे।

2 टिप्‍पणियां:

  1. वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
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