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सोमवार, 9 दिसंबर 2013

चाहत का शोर

नजरों से नजरें मिलीं
ज़माने भर की बातें हो गयीं
यूँ तो पहली बार मिले
लगा कई मुलाकातें हो गयीं

चैन जाने गया किधर
नींदें भी गायब हो गयीं
दिन तो दूभर हो ही गया
लंबी ये रातें हो गयीं

सांसों में बहने लगे हो
जीवन का संगीत हो
यूँ कहो, तुम चाह मेरे
तुम ही मेरे मनमीत हो

जो लहरें इस ओर उठी हैं
वैसी ही उस ओर हैं क्या ?
अपनी धड़कनों को सुनकर देखो
चाहत का कोई शोर है क्या ?

मंगलवार, 23 जुलाई 2013

कुण्डलिया:शिक्षा

कहने को तो दे दिया, शिक्षा  का अधिकार। 
लेकिन दूषित हो रहा, बच्चों का आहार।
बच्चों का आहार, तरीका नहीं स्वदेशी। 
करते वाद-विवाद, सभी हैं इसमें दोषी।
कितने हैं बेहाल, यहीं पर अब रहने दो।
नैतिकता रह गयी, यहाँ केवल कहने को।।


रविवार, 21 जुलाई 2013

रेत पर लिखा

अब तो ज़िन्दगी भी मुझे 

मेरे हाल से पहचानती है
अफ़सोस! मेरे आईने ने
मेरा चेहरा भुला दिया

जहाँ सजते-उजड़ते रहे
कई मेले रिश्तों के
मैंने भी अपनी यादों का
एक कुनबा बसा दिया

लहरें भी नहीं आतीं
इस दिल के समंदर में
मैंने हाथों से ही अपने
रेत पर लिखा मिटा दिया

तेरे बगैर जीने का
जो वादा किया मैंने
झूठी मुस्कानें आज़ाद हैं
अश्कों पे ताला लगा दिया।

जीवन की तरुणाई देखी

कमर हिलातीं बेलें देखीं 

हरी भरी अमराई देखी।

ऊँचे पेड़, पहाड़ देखे
तरण ताल, तराई देखी।

प्राण हरती गरम हवाएँ
पछुआ और पुरवाई देखी।

नयी नवेली प्यारी दुल्हन
विरह में मुरझाई देखी।

बिन सावन जो सूखी रहतीं
नदियाँ भी इतराई देखी।

अषाढ़ का सूखा भी देखा
फसलें भी लहलहाई देखी।

प्रकृति सब उपकार है तेरा
जीवन की तरुणाई देखी।

रविवार, 9 जून 2013

बूँद

बादलों में था छुपकर बैठा

बारिश के संग आया हूँ
पेड़ों पर भी नृत्य किया है
पर्वत से टकराया हूँ।

पत्तों पर आराम किया है
लहरों पर लहराया हूँ
जब थका नदियों में बहकर
दूब पर बैठ इतराया हूँ।

तेरे नयनों की बूँद बना मैं
देख तेरा सरमाया हूँ ...

शनिवार, 8 जून 2013

बूँदों की बारात

दूर गगन से आई देखो 

बूँदों की बारात
अवनि का अंतर धुला
धुल गयी है रात।

निर्झर सा बहने लगा
जीवन का संगीत
गलबाहीं वृक्षों ने डाली
चहुँओर है प्रीत।

पुलकित हुई नयनों की ज्योति
हर्षित मन का मोर हुआ
नृत्य कर रहीं फूल-पत्तियाँ
रिमझिम रिमझिम शोर हुआ।

शनिवार, 1 जून 2013

तुम आ जाओ तो बात बने

वीरान रात सी वीरान ज़िन्दगी

सपने भी तो वीरान से हैं
अब तो नये हालात बनें
तुम आ जाओ तो बात बने ।

तन्हा चाँद है, तन्हा दिल है
मैं भी तो तन्हा सा हूँ
अब तो कोई साथ बने
तुम आ जाओ तो बात बने।

दूर है मंजिल, दूर हो तुम भी
खुशियाँ भी तो दूर ही हैं
अब तो एक मुलाकात बने
तुम आ जाओ तो बात बने।

ठण्डी साँसें,  ठण्डी आँहें
रिश्ते भी ठंडे से हैं
अब तो गरम ज़ज्बात बने
तुम आ जाओ तो बात बने।

खुश थीं आँखें, खुश थीं बाहें
हम दोनों भी खुश से थे
फिर से वही शुरुआत बने
तुम आ जाओ तो बात बने।