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रविवार, 3 अप्रैल 2016

तू क्यों ना माने पगली तू क्या है

अंधियारे से इस गगन में
हिचकोले खाते जीवन में
उम्मीदों की है तू बदली और क्या है
तू क्यों ना माने पगली तू क्या है

रत्न भरें हों रतनालय में
भले जड़े हों देवालय में
कोहिनूर है तू ही असली और क्या है
तू क्यों ना माने पगली तू क्या है

सात जनम की बात न जानूँ
हस्त गणित की बात न मानूँ
जिंदगी तू ही अगली पिछली और क्या है
तू क्यों ना माने पगली तू क्या है

मुस्कानों के मोती ले ले
आँखों की ये ज्योति ले ले
निर्मल सरल हृदय ये तेरा
शरारत वाली बातें ले ले

प्रमाणों का ढ़ेर है पगली और क्या है
फिर भी क्यों ना माने पगली तू क्या है

मंगलवार, 23 फ़रवरी 2016

राजीव के 'फूल'

हिये चोट ना राखिये, मन पर मन भर भार।
धरा चीर ऊपर निकले, तरु धरे आकार ।।

मीठा-मीठा जग कहे, छिपी तेज तलवार।
दो लोचन पीछे धरो, बचे पीठ का वार ।।

प्रसून प्यारे भ्रमर को, जुगनू को है रात।
अपने हिस्से में दर्द, अपनी अपनी बात ।।

निद्रा ही संसार है, सूने होश हवास।
सपने उड़ते देखिये, खग बन बन आकाश ।।

विरह वेदना से भरी, बैठी लेकर आस।
साजन सरहद पर डटे, जीतेगा विश्वास ।।

फलीभूत जब धारणा, मन में रहे उमंग।
गाँधी होते खुश वहाँ, सब मिल रहते संग ।।





बसंत आने वाला है

पतझड़ नीरस नहीं है
पतझड़ बेकार नहीं है
बसंत भी आता है
पतझड़ ही तो हर बार नहीं है

पतझड़ कहता है -
मैं पारदर्शी हूँ
तुम भी पारदर्शी कहलाओ
जो तुम्हारे अंदर है
वही बाहर भी दिखे
ऐसी छवि बनाओ

पतझड़ कहता है -
तैयारियाँ करो स्वागत की
बसंत आने वाला है
मैं जा रहा हूँ
मेरा अंत आने वाला है

होने वाली है सुबह
देखो नया कल आने वाला है।

शनिवार, 11 अप्रैल 2015

साथ चलेंगे

अब जो हंसकर थाम लिया है
हाथ तुम्हारा, साथ चलेंगे
बीते किस्से बीत चूके हैं
करने नई शुरुआत चलेंगे

ऋतु कोई भी आये जाये
जो भी हों हालात चलेंगे
सर्द हवा के झोंके हों
या गर्मी और बरसात चलेंगे

कल ना जाने क्या हो जाये
सपनें सारे ना खो जाएं
अंजाने से डर भी होंगे
मन में कई सवालात चलेंगे

डर ये सारे छोड़ के पीछे
हाथों में ले हाथ चलेंगे
धरती और सूरज के जैसे
मिलकर हम दिन रात चलेंगे

अब जो हंसकर थाम लिया है
हाथ तुम्हारा, साथ चलेंगे।

बुधवार, 31 दिसंबर 2014

जो तू मिला

जो तू मिला तो मैं मिला
जो तू चला संग मैं चला
गर तू गया तो जान ले
मर भी गया मिट भी गया

ज़िद ये नहीं ज़ज्बात है
तुझसे ही अब हर बात है
तू रौशन सवेरा है बना
खुशियों की ये शुरुआत है

तकलीफ में थी ज़िन्दगी
भूला  था मैं तो बन्दगी
मुस्कान तेरी देखकर
उम्मीद फिर से है जगी

बन जा तू मेरा इस दफ़ा
मत बैठ मुझसे यूँ ख़फ़ा
हाथों में दे दे हाथ तू
ले तेरी हुई मेरी वफ़ा

गर तू गया तो जान ले
मर भी गया मिट भी गया। 

नींद क्यूँ है लापता

आँखों में बैठी है थकन
सपने भी तेरे हैं पले
पलकें झुकीं हैं बोझ से
पर नींद क्यूँ है लापता

जाने भटकता हूँ कहाँ
इस ओर से उस ओर तक
अब दूर इतनी आ गया
कि ढूँढू खुदका ही पता

अब क्या करूँ कुछ तो बता
दे दे कोई तू आसरा
तू साथ चलता है तो चल
मिल जायेगा कोई रास्ता। 

सोमवार, 22 दिसंबर 2014

प्यार हम करते रहें

यूँ हवा चलती रहे
और साथ हम चलते रहें
खामोशियाँ हों हर तरफ
बस बात हम करते रहें

हर ग़म फ़ना कर ज़िन्दगी से
और शिकन माथे से हटा
बस अविरल मुस्कान की
बरसात हम करते रहें

सागर मचलता ही रहे
और लहरों पे संगीत हो
खोये रहें एक दूसरे में
कई ज़ज्बात यूँ पलते रहें

कुछ हसीं यादें चुनें
कुछ बोल मीठे बोल लें
संग रात भी चलती रहे
और प्यार हम करते रहें